लखनऊ,क़ौमी रिपोर्टर: योगी सरकार (YOGI SARKAR) को लेकर अक्सर कहा जाता है कि वह मुस्लिम मुखालिफ है। कभी मुसलमानों को बीजेपी का टिकट न मिलने पर इस प्रोपोगंडा को हवा दी जाती है तो कभी किसी मुस्लिम क्रिमिनल के खिलाफ कार्रवाई होने पर।
खास बात यह कि इस बात को लेकर आम मुसलमान शायद कभी ग़ौर ओ फिक्र भी न करे लेकिन मुखालिफ सियासी पार्टियां खूब हवा देती हैं। हालांकि जब इस प्रोपोगंडा को हकीकत की कसौटी पर आंका गया तो हकीकत कुछ और ही है। मिसाल के तौर पर हुकूमत ने पिछली सरकार के मुकाबले अक्लियती तबके की फ़लाह ओ बहबूदी के लिए 68 हज़ार 4 सौ 2 करोड़ रुपये की ज़्यादा रकम मुहैय्या कराई है।
सरकार ने अपने तशकील की इब्तेदा में ही कहा था कि तस्कीन यानि तुष्टिकरण किसी का नही लेकिन प्रोग्रेस सबकी।अब जबकि चार साल से ज़्यादा का वक़्त योगी सरकार बिता चुकी है ऐसे में यह समझना जरूरी है कि योगी सरकार ने अक्लियती तबके के लिये किया क्या।
दरअसल योगी सरकार ने अक्लियती तबके को एखतेसादी तौर पर मज़बूत बनाने के लिए बजट में हर साल हज़ारों करोड़ रुपए दिए हैं। सेंटर और सूबाई सरकार की मुख्तलिफ स्कीमों जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना,सौभाग्य योजना,उज्जवला योजना,खाद्यान्न योजना, आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जनआरोग्य योजना समेत किसी भी स्कीम में सभी के साथ अक्लियती तबके को इसका फायदा मिलने के साथ ही खुसूसी तौर पर उनके लिए सूबाई सरकार ने अलग से बजट जारी किया है।
आइडेन्टिफाइड जिलों में सवा 12 लाख से ज्यादा लोगों को दिए 21 हजार करोड़
सूबे में 21 जिले बदायूं, बागपत, बहराइच, बलरामपुर, बाराबंकी, बरेली, बिजनौर, बुलन्दशहर, गाजियाबाद, अमरोहा, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, रामपुर, सहारनपुर, शाहजहांपुर, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर अक्लियती तबके के अक्सरियत वाले ज़िले हैं। इन जिलों में फाइनेंशियल इयर 2020-21 में दिसंबर तक 12,26,499 लोगों को 21,406.04 करोड़ दिए गए हैं, जो कुल प्रॉयरिटी इलाकों के तहत दिए गए लोन का 12.015 (खाते) और 14.44 फीसदी (रकम) है। जबकि पूरे सूबे में प्रॉयरिटी इलाकों के तहत एक करोड़ 57 लाख 59 हजार 712 कमजोर वर्गों को कुल 369270 करोड़ दिए गए हैं।
नौ फीसदी ज्यादा अक्लियती तबके को दी रकम
अक्लियती तबके की फलाह ओ बहबूदी वाली स्कीम को प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय स्कीम में भी शामिल किया गया है। इन समुदायों को प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के तहत कमजोर वर्गों के लिए अलग-अलग श्रेणी में लोन देने के लिए वर्गीकृत किया गया है। साथ ही इन्हें प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के तहत कुल लोन का 15 प्रतिशत तक देने के निर्देश हैं। जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में दिसंबर तक बैंकों ने पूरे प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के 20,34,654 लोगों को 53,325.88 करोड़ दिए गए हैं, जो कुल प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के तहत दिए गए लोन का क्रमशः 24.43 फीसदी (खाते) और 20.07 फीसदी (रकम) है।
पिछली सरकार और मौजूदा योगी हुकूमत में अक्लियती तबके की फ़लाह ओ बहबूदी के लिए बजट में जारी की गई रकम का मुकाबला किया जाए तो कुछ ऐसी सूरत निकल कर सामने आती है।
सपा सरकार
फाइनेंशियल इयर रकम
2012-13 48508
2013-14 66169
2014-15 69779
2015-16 80417
2016-17 85989
कुल 3,50,862 करोड़
योगी सरकार
फाइनेंशियल इयर। रकम
2017-18 90574
2018-19 101786
2019-20 109180
2020-21 दिसंबर तक 117724
कुल 4,19,264 करोड़
