India Action Against Pak: जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले, जिसमें 28 निर्दोष पर्यटकों की जान गई, के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ अब तक के सबसे सख्त कदम उठाए हैं।
इस हमले को पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद की बड़ी साजिश माना जा रहा है, जिसके जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब की अपनी यात्रा बीच में छोड़कर तुरंत भारत लौटने का फैसला लिया। वापस लौटते ही उन्होंने कैबिनेट की सुरक्षा समिति की आपात बैठक बुलाई, जिसमें पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने और उसके खिलाफ कड़े फैसले लेने पर सहमति बनी।
सबसे बड़ा निर्णय सिंधु जल समझौते को तत्काल प्रभाव से रोकने का रहा, जो 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच जल-बंटवारे का आधार था। इस समझौते को रोकने का मतलब है कि पाकिस्तान को भारत से बहने वाली नदियों का पानी अब नहीं मिलेगा, जिससे वहां जल संकट गहरा सकता है।
इसके अलावा अटारी बॉर्डर को पूरी तरह सील करने का फैसला हुआ है, जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच सीमित आवाजाही भी बंद हो जाएगी। पाकिस्तानियों को जारी सभी वीजा रद्द कर दिए गए हैं, और भारत में मौजूदा पाक नागरिकों को 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।
इतना ही नहीं, भारत ने दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में तैनात सेना, नेवी और एयरफोर्स के सलाहकारों को एक सप्ताह के भीतर देश छोड़ने को कहा है और वहां के स्टाफ की संख्या 55 से घटाकर 30 कर दी गई है।
भारत ने इस्लामाबाद स्थित अपने उच्चायोग से भी अधिकारियों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है और वहां की स्टाफ संख्या भी 30 तक सीमित की जाएगी। यह सभी निर्णय इस बात का संकेत हैं कि भारत अब पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने की कीमत उसे चुकानी होगी।
भारत सरकार ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है, जिसमें इन निर्णयों पर विपक्षी दलों की राय ली जाएगी और संभवतः और भी सख्त कदमों पर विचार किया जाएगा।
