रायबरेली 16 मई 2026: यहां कनिष्ठ शिक्षकों ने उनके समायोजन के खिलाफ हल्ला बोल दिया है। शिक्षकों ने इस प्रक्रिया के खिलाफ जिलाधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।
इस दौरान शिक्षिकों ने बड़ी तादाद में समायोजन प्रक्रिया के खिलाफ कलेक्ट्रट मे प्रदर्शन किया है। शिक्षकों ने इसे कोर्ट आदेश के विपरीत बताते हुए नियम विरुद्ध समायोजन किया जाना बताया है।
समायोजन सूची में नाम आने के बाद सैकड़ों कनिष्ठ शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान कनिष्ठ शिक्षकों ने जिलाधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा है। जिलाधिकारी की तरफ से सिटी मजिस्ट्रेट ने शिक्षकों का ज्ञापन लिया है। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने यह आश्वासन भी दिया कि जो अधिकतर जनपद में हो रहा है वही प्रक्रिया रायबरेली में भी अपनायी जायेगी। इस दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी आश्वासन दिया है कि शिक्षक हितों का ध्यान रखा जायेगा।
प्रदर्शन के दौरान कनिष्ठ शिक्षकों की तरफ से सहायक अध्यापक अनुराग मिश्र ने बताया कि सन 2018 और सन 2024 में उच्च न्यायालय ने कनिष्ठ शिक्षकों के समायोजन को रद्द किया था। जबकि जनपद रायबरेली में मनमाने ढंग से यह प्रक्रिया अपनायी जा रही है। उन्होंने कहा कि जारी गई की गई सूची में कनिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस दिखाया गया है जिससे शिक्षकों में निराशा एवं आक्रोश व्याप्त है।
कनिष्ठ शिक्षकों का पक्ष रखते हुए सहायक अध्यापक वरुणेंद्र ने बताया कि अभी अगस्त 2025 में ही कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हो चुका है। फिर से यदि उनका समायोजन किया जाता है तो वे जिस विद्यालय में जाएंगे वहां भी कनिष्ठ होंगे। उन्होंने कहा इस प्रकार बार-बार उन्ही का समायोजन होता रहेगा और वह फुटबॉल की भांति इधर से उधर फेके जाएंगे।
कनिष्ठ शिक्षक सत्येंद्र सिंह का कहना है कि पूरे प्रदेश में समायोजन प्रक्रिया गतिमान है और 40 से अधिक जनपद में वरिष्ठ शिक्षकों का समायोजन किया जा रहा है। जबकि रायबरेली व सात आठ अन्य जनपदों में कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन किया जा रहा है
समायोजन प्रक्रिया की विसंगतियों के विषय में बताते हुए सहायक अध्यापक दुर्गेश मिश्र व अखिलेश सिंह ने कहा कि इसमे प्रधानाध्यापक को भी सहायक अध्यापक के रूप में गिना जा रहा है जो कि नियम विरुद्ध है। शिक्षकों ने कहा कि वरिष्ठता सूची बनाते समय विद्यालय की जॉइनिंग देखी जा रही है जो नियम विरुद्ध है। उन लोगों ने कहा कि वरिष्ठता सूची का निर्धारण करते समय हमेशा जिले की ज्वाइनिंग तिथि को आधार माना जाता है।
इस दौरान सभी शिक्षकों ने एक स्वर में यह भी कहा कि यदि पुनः कनिष्ठ शिक्षकों का ही समायोजन किया जाएगा तो वह लोग न्याय के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होंगे।
प्रदर्शन के दौरान अनुराग, दुर्गेश, अखिलेश, प्रियंवदा तबस्सुम, मंजूलता विजय कांति, आशीष चंद्रशेखर, सत्येंद्र सिंह, अखिलेश आनंद, प्रीति कौशल,संजय, रमेश, प्रीति त्रिपाठी, शिवालिका त्रिपाठी, धर्मराज, नसीम तथा बृजेश श्रीवास्तव सहित सैकड़ो की संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे
