Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को केंद्र सरकार से मांग की कि वह पश्चिमी देशों द्वारा जारी की गई नकारात्मक यात्रा परामर्श (Negative Travel Advisories) को हटवाने के लिए कूटनीतिक प्रयास करे। उन्होंने कहा कि यदि वाकई केंद्र यह मानता है कि कश्मीर की स्थिति सामान्य हो चुकी है, तो इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रमाणित किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एक पर्यटन कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा, “हमें बार-बार बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर अब सामान्य हो गया है, लेकिन अगर पश्चिमी देश अब भी अपने नागरिकों को यहां आने से मना कर रहे हैं, तो यह दावा अधूरा है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि विदेश मंत्रालय को अपनी कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि वे अपनी सख्त यात्रा परामर्श को हटाएं या कम करें।
मूल्य आधारित पर्यटन पर ज़ोर
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला, जो प्रदेश में पर्यटन विभाग भी संभाल रहे हैं, ने कहा कि केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देने की बजाय ‘मूल्य आधारित पर्यटन’ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें यह देखना होगा कि क्या हमें पूरी तरह नई पर्यटन नीति की जरूरत है या मौजूदा नीति में संशोधन से काम चल सकता है।”
1989 से पहले के दौर की याद
मुख्यमंत्री ने 1989 से पहले के कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में हजारों की संख्या में विदेशी पर्यटक घाटी का रुख करते थे। उन्होंने कहा, “तब न तो पंजीकरण कोई बाधा था, न ही किसी को यहां आने से रोका जाता था। आज भी पंजीकरण कोई समस्या नहीं है, असली समस्या ये यात्रा परामर्श हैं, जिनके कारण पर्यटकों के बीमा भी अमान्य हो जाते हैं।”
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को विश्वास दिलाना जरूरी
अब्दुल्ला ने कहा कि केवल भारत सरकार के दावों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को विश्वास नहीं होगा। उन्होंने कहा, “व्हाइट हाउस में बैठे लोग भारतीय अखबार नहीं पढ़ते। उन्हें यह दिखाने के लिए कि कश्मीर अब सुरक्षित है, विदेश मंत्रालय को ठोस कदम उठाने होंगे।”
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब केंद्र सरकार लगातार दावा कर रही है कि जम्मू-कश्मीर में हालात पूरी तरह सामान्य हो चुके हैं और पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी इसका प्रमाण है।
