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मुसलमानों को विलेन दिखाने वाले अफसाने तोड़ने होंगे,पॉलिगैमी और फैमिली प्लानिंग से गुरेज जैसे मामले महज़ अफसाने हैं-साबिक़ चीफ इलेक्शन कमिश्नर

सैय्यद हुसैन अख्तर

@चीफ एडिटर,sakhtaretv@gmail.com

क़ौमी रिपोर्टर:मुसलमानों को विलेन दिखाने वाले अफसानों को तोड़ने की ज़रूरत है।पॉलिगैमी यानी चार शादियां और फैमिली प्लानिंग जैसे अफसाने मुसलमानों के साथ जोड़ दिए गए हैं जो सरासर बेबुनियाद हैं और प्रोपोगंडा का हिस्सा हैं।
इंडिया टीवी वेबसाइट पर पीटीआई भाषा के हवाले से छपी खबर के मुताबिक साबिक़ चीफ इलेक्शन कमिश्नर ऑफ इंडिया डॉक्टर एस वाई कुरैशी ने अपनी किताब में इन अफसानों को तोड़े जाने की बात कही है। डॉक्टर कुरैशी की हाल ही में आई किताब “द पॉप्युलेशन मिथ:इस्लाम,फैमिली प्लानिंग एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया”में कहा गया है कि यह प्रोपोगंडा सरासर गलत है कि पॉप्युलेशन के मामले में मुसलमान किसी कॉन्सपिरेसी का हिस्सा है,और वह हिंदुओं से आगे निकल जाना चाहता है।
किताब में कहा गया है कि मुसलमानों की तादाद हिंदुओं की पॉप्युलेशन को कभी चुनौती नहीं दे सकती।साबिक़ इलेक्शन कमिश्नर कहते हैं कि हिंदुत्व ग्रुप के ज़रिए मुसलमानों के खिलाफ लंबे वक्त से ऐसी पब्लिसिटी की जाती रही है जिसे तोड़ने की ज़रूरत है।वह कहते हैं फैमिली प्लानिंग से गुरेज को इस्लाम का हिस्सा बता कर प्रोपोगंडा किया जाता रहा है जबकि 1931 आए 1960 के सेन्सस को नज़ीर मानें तो सभी कॉम्युनिटी में पॉलिगैमी में गिरावट दर्ज की गई जिनमें मुसलमानों में यह दर ज़्यादा है। जबकि हक़ीक़त यह है कि इस्लाम मे यह कॉन्सेप्ट ज़्यादा शिद्दत से इस मायने में डिस्करेज करने वाला है कि यहां शादी ही तब की जाती है जब लड़का अपनी बीवी और बच्चों की किफ़ालत यानि देखभाल बेहतर तरीके से कर सके।
इसी तरह चार शादियों के पीछे ज़्यादा बच्चे पैदा करते हैं के प्रोपोगंडा को रद्द करते हुए डॉक्टर कुरैशी कहते हैं कि भारत के मुसलमानों में सबसे कम चार शादियों का रेशियो रिकॉर्ड है।
इसी तरह एस वाई कुरेशी मुसलमानों में औरतों पर जुल्म का जवाब देते हुए कहते हैं यह कैसे मुमकिन है जबकि बेटी को प्रॉपर्टी में हिस्सा देने की शुरुआत 14 सौ साल पहले मुसलमानों ने की जबकि पूरी दुनिया समेत भारत में यह 20 सदी में मुमकिन हो पाया।
डॉक्टर एस वाई कुरैशी 2010 से 2012 तक मुल्क में चीफ इलेक्शन कमिश्नर रहे हैं और फ्री फेयर इलेक्शन कराए जाने के लिए उन्हें याद किया जाता है।

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