आरएसएस-मुस्लिम (RSS-MUSLIM) एजेंडे पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ काम कर रहा है। इसके लिए RSS उर्दू ज़बान को मुस्लिम घरों में पैठ बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इस कड़ी में RSS चीफ मोहन भागवत की किताब का उर्दू तर्जमा मुस्तक़बिल का भारत का सहारा लिया जा रहा है। आरएसएस का मानना है कि इससे मुसलमानों के बीच RSS-MUSLIM एज़ेंडे को आगे बढ़ाया जा सकता है।
- सैयद हुसैन अख्तर, चीफ एडिटर, कौमी रिपोर्टर
आरएसएस (RSS) उर्दू ज़बान को मुस्लिम घरों में पैठ बनाने के लिए RSS-MUSLIM एज़ेंडे को आगे बढ़ा रहा है। इसके लिए आएसएस चीफ मोहन भागवत की किताब ‘भविष्य का भारत’ का उर्दू में तर्जुमा कर इसे किताब की शक्ल दी गई है। इस किताब का टाइटल है ‘मुस्तक़बिल का भारत’।
किताब का उर्दू तर्जुमा किया है नैशनल काउंसिल बराये फ़रोग़ उर्दू के डायरेक्टर अक़ील अहमद ने। 5 अप्रैल पीर के रोज़ आरएसएस लीडर डॉ कृष्ण गोपाल और सेंट्रल एजुकेशन मिनिस्टर रमेश पोखरियाल निशंक इस किताब का दिल्ली में इज्रां करेंगे।
इस किताब के तर्जुमे से लेकर प्रिंट होने तक की निगरानी भी खुद नैशनल काउंसिल बराये फ़रोग़ उर्दू की ही है। नैशनल काउंसिल बराये फ़रोग़ उर्दू एचआरडी मिनिस्ट्री के ज़ेरे निगरानी चलने वाली ऑटोनॉमस बॉडी है, जो मुल्क़ में उर्दू ज़बान के फ़रोग़ को लेकर काम करती है।
हिंदी अखबार अमर उजाला में काउंसिल के डायरेक्टर अक़ील अहमद के हवाले से कहा गया है कि उर्दू में इस किताब के आने से आरएसएस को लेकर मुसलमानों के दरमियान जो ग़लतफ़हमियाँ हैं, वह दूर होंगी। कह सकते हैं कि इससे RSS-MUSLIM एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
साल 2018 में दिल्ली के विज्ञान भवन में मोहन भागवत के लेक्चर्स को कंपाइल करके सबसे पहले इसे ‘भविष्य का भारत’ के तौर पर हिंदी में सुरुचि प्रकाशन, दिल्ली ने छापा था। बाद में, इसे कई रिज़नल ज़बानों में पब्लिश किया गया। अब इसी किताब को नैशनल काउंसिल बराये फ़रोग़ उर्दू ‘मुस्तक़बिल का भारत’ टाइटल से पब्लिश कर रही है जिसका 5 अप्रैल को इज्रां भी है।
इस किताब को लेकर दावे यही किये जा रहे हैं कि इसके जरिये आरएसएस (RSS) के नज़रिए को सही मायनों में समझा जा सकेगा, जो हिंदुत्व की बात तो करता है, लेकिन मुल्क] में मुसलमानों के वज़ूद और अहमियत से कतई इनकार नहीं करता। हालांकि इंग्लिश अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी ख़बर के मुताबिक नैशनल काउंसिल बराये फ़रोग़ उर्दू के इस काम पर उर्दू राइटर्स और उर्दू स्कॉलर्स ने सवाल उठाए हैं।
दिल्ली उर्दू एकेडमी के साबिक़ वाइज चेयरमैन माजिद देवबंदी के हवाले से अखबार लिखता है कि नैशनल काउंसिल बराये फ़रोग़ उर्दू का यह काम नहीं कि किसी की आइडियोलॉजी को प्रोमोट करे। होना तो यह चाहिए था कि काउंसिल के ज़रिए उर्दू राइटर्स को प्रोमोट किया जाए, यह सरासर फंड का मिसयूज़ है।
वहीं एनजीओ उर्दू कारवां के डायरेक्टर फरीद खान के हवाले से अखबार लिखता है कि बहुत से उर्दू रॉइटर्स तंगहाली में जी रहे हैं, उन्हें प्रोमोट किया जाना चाहिए. मगर काउंसिल के डायरेक्टर मोहन भागवत की किताब में इंटरेस्टेड हैं।
(सैयद हुसैन अख्तर, @चीफ एडिटर, email-sakhtaretv@gmail.com)

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