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PM Modi Mohan Bhagwat: RSS हेडक्वार्टर जाएंगे PM नरेंद्र मोदी, अकेले में मोहन भागवत से करेंगे बात

PM Modi Mohan Bhagwat

PM Modi Mohan Bhagwat:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत से अकेले में बात करेंगे.

बीते लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की संघ को लेकर की गई एक टिप्पणी के कारण संघ और भाजपा के बीच संबंधों को लेकर सवाल खड़े हुए थे। हालांकि दोनों ने इसका खंडन किया था।

PM Modi Mohan Bhagwat:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को अपने नागपुर दौरे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय भी जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में वह पहले नेता होंगे जो संघ के मुख्यालय का दौरा करेंगे। इस दौरे के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत भी उनके साथ होंगे। मोदी का हिंदू नव वर्ष (गुड़ी पड़वा) पर संघ मुख्यालय जाना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री वहां पर संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और गुरुजी माधवराव गोलवलकर की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। इस दौरान मोदी दीक्षा भूमि भी जाएंगे और वहां डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

पीएम मोदी का संघ मुख्यालय जाना भाजपा और संघ के भविष्य की राजनीति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मोदी और मोहन भागवत कुछ समय के लिए अकेले में बातचीत भी कर सकते हैं। इस दौरान भाजपा के नए अध्यक्ष के चयन पर भी चर्चा हो सकती है, क्योंकि यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू होनी है।

हालांकि पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा और संघ के बीच कुछ दूरी दिखी थी, लेकिन विधानसभा चुनावों में संघ का समर्थन भाजपा को मिला। इस यात्रा के जरिए प्रधानमंत्री मोदी संघ के अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को एक सशक्त संदेश देंगे। उत्तर प्रदेश के घटनाक्रमों को देखते हुए यह दौरा और भी महत्वपूर्ण है, जिससे भाजपा और संघ के रिश्ते और मजबूत होंगे।

बीते लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की संघ को लेकर की गई टिप्पणी पर संघ और भाजपा के बीच कुछ मतभेद उत्पन्न हुए थे, हालांकि दोनों ने इसे नकारा था। अब भाजपा नए अध्यक्ष का चयन करने जा रही है, और मोदी का संघ मुख्यालय जाना इसे सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। इसका प्रभाव भाजपा के आगामी संगठन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

भा.ज.पा. अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन इसे बढ़ाया भी जा सकता है। 2025 में जो नया अध्यक्ष बनेगा, वह 2028 तक तो रहेगा ही और 2029 के अगले लोकसभा चुनाव तक उसका कार्यकाल विस्तार भी हो सकता है। ऐसे में अध्यक्ष के चयन में सामाजिक, राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखना बहुत जरूरी होगा।

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