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मिलिए एमबीए पास पेट्रोल पम्प मालिक से, जिसने शादी में दहेज़ नहीं लिया

क़ौमी रिपोर्टर: पिछले दिनों एक ख़ातून का ख़ुदकुशी से पहले बनाया गया वीडियो वायरल हुआ था।अहमदाबाद की ख़ातून आयशा ने इस वीडियो में ख़ुदकुशी की वजह बयान की है।हालांकि पूरा वीडियो सुनने के बाद केवल इतना ही समझ में आता है कि वह अपने शौहर की हरकतों से आजिज़ थीं।आजिज़ी इस हद तक पहुंच गई कि वह ख़ुदकुशी पर आमादा हो गईं।आयशा की मौत के बाद उनके वाल्दैन ने आजिज़ी का ख़ुलासा किया।

आयशा के वालिद का कहना है कि दामाद लालची क़िस्म का इंसान है।शादी के वक़्त अपनी हैसियत से ज़्यादा जहेज़ दिए जाने के बावजूद दामाद की ख़्वाहिशात में इज़ाफ़ा होता जा रहा था।दामाद की नाजायज़ ख़्वाहिशात से ही आजिज़ आकर बेटी ने ख़ुदकुशी कर ली।यह बात मंज़रे आम पर आते ही जहेज़ के ख़िलाफ़ आवाज़ें बलन्द होने लगीं।तमाम सियासी तंज़ीम और समाजी कारकुन के अलावा ओलेमा भी जहेज़ के ख़िलाफ़ लामबंद हुए।मौलाना ख़ालिद रशीद फिरंगीमहली ने तो नमाज़े जुमा के बाद बाकायदा मुस्लिम नौजवानों से जहेज़ न लिए जाने की अपील तक की।

मुसलमानों में इस्लाम की तालीम के ख़िलाफ़ भले यह बुराई आम हो और आज ओलेमा को इसके ख़िलाफ़ अपील करनी पड़ रही हो लेकिन एक मुस्लिम नौजवान ने हाल ही में बग़ैर जहेज़ की शादी कर मिसाल पेश की है।ऐसा भी नहीं कि जहेज़ मांगे जाने पर उन्हें हासिल न होता।सेल्स एंड मार्केटिंग में एमबीए की तालीम हासिल कर चुके रायबरेली ज़िले के अख़्तर हुसैन पुश्तैनी जायदाद के अलावा पेट्रोल पम्प के मालिक हैं।कोई जिस्मानी कमी भी नही है।बावजूद इसके उन्होंने जहेज़ के नाम पर कुछ भी नहीं लिया है।

14 मार्च को उनके वलीमे के दिन इस सिलसिले में उनसे पूछने पर वह कहते हैं,मुझे ज़रूरत नहीं,जितना मेरे पास है उससे मेरा काम चल रहा है तो मैं जहेज़ क्यों लूं।हालांकि ज़्यादा कुरेदने पर वह बताते हैं कि पिछले तक़रीबन 15 सालों से उनके कुनबे में जितनी भी शादियां हुई हैं उनमें न तो लड़की को दिया गया और न ही लड़के का जहेज़ लिया गया।वह कहते हैं जहेज़ समाजी बुराई है जिसे लेकर सिर्फ तबसेरा किया जाना मुनासिब नहीं।

हर शख़्स को ख़ुद आगे बढ़ कर मिसाल पेश करनी चाहिए।उनका कहना है कि इस्लामी तालिमात के ख़ूबसूरत पहलू मंज़रे आम पर तभी नुमायां होंगे जब मुसलमान उसे अमल में लाएगा।
यक़ीनन अख़्तर हुसैन का यह अमल दुनिया के लिए दर्स भी है कि इस्लाम अमल से फैला है न कि तलवार के ज़ोर पर।

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