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घुड़सवार छात्रों की शाही सलामी, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की मौजूदगी… AMU में शानो-शौकत से मनाया गया सर सैयद डे

सर सैयद अहमद खान की 209वीं यौम-ए-पैदाइश पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में शानदार तकरीब; तालीम, तहज़ीब और समाजी इस्लाह के पैगाम को किया गया याद

अलीगढ़, 17 अक्टूबर 2026। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में शनिवार को यूनिवर्सिटी के बानी सर सैयद अहमद खान की 209वीं यौम-ए-पैदाइश के मौके पर सर सैयद डे पूरे एहतराम और शानो-शौकत के साथ मनाया गया। इस मौके पर यूनिवर्सिटी की तारीखी रवायतों, इल्मी विरासत और सर सैयद के तालीमी मिशन की झलक देखने को मिली। घोड़ों पर सवार छात्रों के दस्ते की पुरवकार सलामी ने तकरीब को खास बना दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों समेत नामवर शख्सियात की मौजूदगी ने आयोजन की अहमियत बढ़ा दी।

यूनिवर्सिटी के गुलिस्तान-ए-सैयद में आयोजित मुख्य तकरीब में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने बतौर मुख्य मेहमान शिरकत की। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सत्यवीर सिंह और इंडियन नेवल एकेडमी, एझिमाला के प्रिंसिपल रियर एडमिरल एस.एम. उरूज अतहर विशिष्ट मेहमानों में शामिल रहे। गुजरात के केपी समूह के संस्थापक अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. फारुक जी. पटेल ने भी खास मेहमान के तौर पर शिरकत की।

घुड़सवार छात्रों की सलामी बनी तकरीब का खास आकर्षण

सर सैयद डे के मौके पर यूनिवर्सिटी के राइडिंग क्लब के 17 छात्रों के दस्ते ने घोड़ों पर सवार होकर मेहमानों को सलामी दी और उन्हें एस्कॉर्ट किया। घुड़सवारों के शानदार अंदाज, अनुशासन और पुरवकार पेशकश ने समारोह में चार चांद लगा दिए।

इस दस्ते में कोच इमरान खान शेरवानी के साथ राइडर फराज मेहदी, सानिया खान और कृष्ण कांत समेत कुल 17 छात्र शामिल रहे। घुड़सवार दस्ते की मौजूदगी ने यूनिवर्सिटी की शानदार रवायतों और तंजीम व अनुशासन की तस्वीर पेश की।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की मौजूदगी ने बढ़ाई तकरीब की अहमियत

इस साल सर सैयद डे की तकरीब में जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की मौजूदगी खास रही। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के फारेग भी हैं और उन्होंने यहां से विज्ञान तथा कानून की तालीम हासिल की थी। उनकी शिरकत ने यूनिवर्सिटी और उसके पूर्व छात्रों के बीच मजबूत इल्मी और संस्थागत रिश्ते को भी उजागर किया।

तकरीब में सर सैयद अहमद खान के मिशन, आधुनिक तालीम की जरूरत और समाज में इल्म व शऊर को फरोग देने की अहमियत पर तवज्जो दी गई।

प्रो. हुसैन नस्र और खाजा बंदानवाज एजुकेशनल सोसाइटी के लिए पुरस्कार

सर सैयद डे के मौके पर इल्म, तहकीक और समाजी खिदमात के क्षेत्र में योगदान को एतराफ दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कारों का भी खास महत्व रहा। सर सैयद अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार अमेरिका की जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के विद्वान प्रो. हुसैन नस्र के लिए घोषित किया गया था। वहीं, राष्ट्रीय पुरस्कार कर्नाटक के गुलबर्गा स्थित खाजा बंदानवाज एजुकेशनल सोसाइटी को दिए जाने का कार्यक्रम था।

इसके अलावा, यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क कार्यालय की ओर से आयोजित अखिल भारतीय निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं की हौसलाअफजाई और उन्हें सम्मानित करने का भी कार्यक्रम रखा गया था।

कुरआनख्वानी और चादरपोशी से हुआ कार्यक्रमों का आगाज

सर सैयद डे के सिलसिले में सुबह यूनिवर्सिटी की मस्जिद में कुरआनख्वानी की गई। इसके बाद सर सैयद अहमद खान की मजार पर चादरपोशी कर उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश किया गया। सर सैयद हाउस में उनके लेखन और किताबों पर आधारित नुमाइश तथा पुस्तक लोकार्पण जैसे कार्यक्रम भी आयोजन का हिस्सा रहे।

मुख्य तकरीब में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. आसिम जफर के इस्तकबालिया खिताब, पुरस्कार वितरण और मेहमानों के खिताब का कार्यक्रम निर्धारित था। कुलपति प्रो. नइमा खातून की सदारती तकरीर और छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एम. अतहर अंसारी के शुक्रिया कलिमात भी कार्यक्रम की रूपरेखा में शामिल रहे।

तालीम और समाजी इस्लाह के अलम्बरदार थे सर सैयद

सर सैयद अहमद खान का जन्म 17 अक्टूबर 1817 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने भारतीय समाज में आधुनिक तालीम, साइंटिफिक सोच और समाजी इस्लाह को फरोग देने के लिए अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से 1877 में मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की बुनियाद पड़ी, जो आगे चलकर 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बना।

सर सैयद का यकीन था कि किसी भी समाज की तरक्की का रास्ता तालीम से होकर गुजरता है। उन्होंने नई तालीम, वैज्ञानिक नजरिये और इल्मी बेदारी को समाज की जरूरत बताया। उनकी यही सोच आज भी नई नस्ल के लिए रहनुमाई का जरिया है।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में सर सैयद डे की यह तकरीब उनके मिशन को याद करने, इल्म की अहमियत को दोहराने और आने वाली नस्लों को तालीम व तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ने का पैगाम देती है। सर सैयद की विरासत आज भी इस बात की याद दिलाती है कि तालीम ही समाज में बेदारी, तरक्की और सकारात्मक तब्दीली की बुनियाद है।

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