ऑफ़ बीटसेहत

मोहम्मद गुफरान ने वेल्डिंग की दुकानों से सिलेंडर इकट्ठा किया और बचा ली तकरीबन पचास लोगों की जान

अमेठी, क़ौमी रिपोर्टर: मालिक मोहम्मद जायसी की पाकीज़ा ज़मीन जायस से यह खबर दिल को सुकून देने वाली है।यहां के यूनानी दवा कारोबारी मोहम्मद गुफरान ने ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी दूर करने का नायाब तरीका ढूंढ निकाला था। यह तकरीबन 20-25 दिन पहले तब की बात है जब ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए हाहाकार मचा था। अचानक जब कोरोना से लोग बीमार पड़ने लगे थे तब मोहम्मद गुफरान ने अपने दो डॉक्टर दोस्तों की मदद से घर घर जाकर इलाज का बीड़ा उठाया था। इस दौरान बड़ी परेशानी यह सामने आ रही थी कि मरीजों का ऑक्सीजन लेवल घटने का सिलसिला शुरू हो गया था।परेशानी की बात यह थी कि आक्सीजन सिलेंडर अचानक बाजार से गायब हो गए थे।

लखनऊ,सुल्तानपुर,रायबरेली, गौरीगंज और फतेहपुर तक से ऑक्सीजन सिलेंडर हासिल करने की कोशिश की गई लेकिन हर जगह मायूसी हाथ लगी।तीनो दोस्त इस कशमकश में थे कि खाली सिलेंडर ही कहीं से मिल जाएं तो आसपास के प्लांट से उन्हें रिफिल करा लें।इसी बीच मोहम्मद गुफरान के दोस्त डॉक्टर नफीस ने कहा कि वेल्डिंग वालों के पास भी ऑक्सीजन सिलेंडर होते हैं।

चूंकि लॉकडाउन की वजह से उनकी दुकानें बंद हैं लेहाज़ा वहां से सिलेंडर लेकर प्लांट से भरवाया जा सकता है।मोहम्मद गुफरान ने अपने पारिवारिक मित्र जिनकी सुल्तानपुर में वेल्डिंग की दुकान है उन्हें फोन करके दरयाफ़्त किया।

वह इस नेक काम के लिए खुशी खुशी तैयार हो गए और अपनी दुकान से दो खाली सिलेंडर फ़राहम करा दिये।यहां कामयाबी मिली तो हौसला बढ़ा और फिर कई दीगर वेल्डिंग दुकानदारों के ज़रिए तकरीबन दस बारह सिलेंडर का स्टॉक इन लोगों ने कर लिया।

इन सिलेंडरों को रोटेशन में कभी जगदीशपुर तो कभी रायबरेली और फतेहपुर के प्लांट से रिफिल कराया जाने लगा।मोहम्मद गुफरान कहते हैं,ऑक्सीजन सिलेंडरों की कमी पूरी हुई तो हमारे डॉक्टर दोस्त नफीस और हसनैन का हौसला ज़्यादा बढ़ गया।जायस और आसपास के इलाकों से जब भी किसी के बीमार होने की जानकारी मिलती,यह डॉक्टर दोस्त खुद अटेंड करते और ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ने पर सिलेंडर लगा दिया जाता।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से तालीमयाफ्ता मोहम्मद गुफरान कहते हैं कि यह कारे खैर है जिसके लिये अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं कि उसने हम लोगों को मुन्तख़ब किया।वह कहते हैं कि यह सारा काम मरीजों से बिना पैसा लिए अंजाम दिया जा रहा था।

पैसों की कमी पूरी करने के लिए हम दोस्त ही आपस में कॉन्ट्रिब्यूट करके इस खिदमत को अंजाम दे रहे थे।वह कहते हैं कि उस दौरान जब सिलेंडर, रेगुलेटर से लेकर ऑक्सीजन किट तक बाजार में नहीं मिल रही थी,हम दोस्तों ने किसी भी तरह इसे हासिल किया।वह कहते हैं इत्मीनान है कि कई लोगों की जान बचाई जा सकी।

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