लखीमपुर खीरी के एक थाना इंचार्ज की कार्यशैली खाकी वर्दी को गौरान्वित कर रही है। थाना इंचार्ज ने जान की बाज़ी लगाकर पानी में डूब रहे पांच दोस्तों को सही सलामत बाहर निकाल लिया। हालांकि इस दौरान उन लोगों के साथ नहा रहे छठे दोस्त ने अस्पताल पहुँच कर दम तोड़ दिया।
जान की बाज़ी लगाकर पांच युवकों को ज़िंदा बचा लेने वाले सब इंस्पेक्टर का नाम है रविंद्र सोनकर। रविंद्र सोनकर की तैनाती ज़िले के पसगवां थाना इलाके में थाना इंचार्ज के तौर पर है। सत्रह मार्च को एसओ रविंद्र सोनकर दोपहर बाद क्षेत्र भ्रमण कर थाने लौटे तभी उन्हें सूचना मिली कि किशनपुर गांव स्थित मुड़ी झाल में नहा रहे छह युवक डूब गए हैं।
रविंद्र सोनकर बिना एक पल गंवाये मौके पर पहुंचे तो वहां ग्रामीण किसी तरह रस्सी आदि की मदद से युवकों को निकालने का प्रयास कर रहे थे। मौके पर कोई प्रशिक्षित गौताखोर न होने की वजह से युवक पल पल मौत के करीब जा रहे थे।
ग्रामीण परिवेश में पले बढे रविंद्र सोनकर बचपन से ही तैराकी जानते थे। अपने इस ज्ञान को उन्होने सही समय पर इस्तेमाल करते हुए तुरंत वर्दी उतारी और कच्छा बनियान में पानी के भीतर कूद पड़े। देखते ही देखते रविंद्र सोनकर ने सभी छह दोस्तों, धर्मेंद्र पुत्र रामकिशुन राठौर (18), वीरू पुत्र श्यामधर पासी (18), सरोज पुत्र विनोद तेली (14), रवि पुत्र नन्हू पासी (18), सचिन पुत्र राजू रैदास (16) और अगम मिश्रा पुत्र गुड्डे मिश्रा (18) निवासी ग्राम खरगापुर को बाहर निकाल लिया।
सभी को आनन फानन सीएचसी पसगवां ले जाया गया जहाँ धर्मेंद्र को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया वहीं अन्य पांच पूरी तरह खतरे से बाहर बताया। एक युवक को न बचा पाने से दुखी रविंद्र सोनकर ने क़ौमी रिपोर्टर से बात करते हुए कहा, उन्हें पांच लोगों को सकुशल बचा लेने की ख़ुशी तो हैं लेकिन एक की मौत से कष्ट भी बहुत हैं।
उन्होंने कहा कि बचपन में शौकिया गांव के तालाब और पोखर में नहाते नहाते कब उन्हें तैराकी आ गई वह खुद नहीं जानते। लेकिन उनके बचपन का यह शौक पांच पांच लोगों की जान बचा लेगा यह उन्होंने कभी नहीं सोंचा था।
उधर सीएचसी में मौजूद किशनपुर गांव के रहने वाले राम समुज सरोज थाना इंचार्ज की इस बहादुरी पर अपने साथियों से उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे थे। रविंद्र सोनकर लखीमपुर खीरी से पहले रायबरेली ज़िले में तैनात थे।
ईमानदार छवि के रविंद्र सोनकर यहां कई थानों के इंचार्ज रहे थे। रविंद्र सोनकर ने अपनी तैनाती के दौरान किसी दबाव में कभी काम नहीं किया। बताया जाता है कि रविंद्र सोनकर अनुचित सिफारिशों को नहीं मानते थे भले उनका ट्रांसफर कर दिया जाये।
