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ज्ञानवापी मस्जिद का मुद्दा बाबरी मस्जिद जैसा बनाने की कोशिश:मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी

बरेली, जीतेन्द्र वर्मा, विशेष संवाददाता, क़ौमी रिपोर्टर: वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में चल रहे मुकदमे पर जुमेरात को वाराणसी फास्ट ट्रैक कोर्ट के दिये गये फैसले पर आल इंडिया तंंज़ीम उलमा ए इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बनारस की ऐतिहासिक ज्ञानवापी मस्जिद मुगल बादशाह औरंगज़ेब आलमगीर ने मस्जिद तोड़कर बनवायी थी ये सरासर झूठ बात है।

उन्होंंने कहा कि सन 1669 के वक्फनामा का हवाला दिया जा रहा है लेकिन इससे यह नहीं साबित होता कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई गई। बादशाह औरंगजेब की शख़्सियत को पढ़े तो पता चलेगा है कि उन्होंने सैकड़ों मंदिरों के रख रखाव के लिए हजारों बीघा जमीनें दान की, उनका एक मशहूर वाक़ेया इतिहास के पन्नों में महफूज़ है।

मौलाना ने कहा कि औरंगज़ेब ने बनारस की ब्राह्मण लड़की “शकुन्तला” को सुरक्षा प्रदान की थी, उस लड़की पर गलत नजर रखने वाले एक मुसलमान कोतवाल को फांसी की सज़ा दी थी। अब ऐसे बादशाह के ताल्लुक़ से यह कैसे मुमकिन हो सकता है कि उन्होंने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई। मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने कहा कि सिविल जज के फैसले के ख़िलाफ़ मुस्लिम पक्ष फैसले का अध्ययन करने के बाद जिला कोर्ट में अपील दायर करेगा।

उन्होंने कहा कि चूंकि इसी से संबंधित हाईकोर्ट में एक मुकदमा विचाराधीन है, कानून यह कहता है कि अगर एक ही मामले में सिविल जज और हाईकोर्ट में केस चल रहा है तो हाईकोर्ट के फैसले का इंतज़ार किया जायेगा।जबत तक हाईकोर्ट का कोई निर्णय नहीं आ जाता उस वक्त तक सिविल कोर्ट कोई फैसला नहीं दे सकता है।

मौलाना ने आगे कहा कि इस जगह पर अनन्त काल से मस्जिद बनी हुई है।वह सवाल उठाते हुए कहते हैं एक जगह दो ज्योतिर्लिंग कैसे हो सकतें है।मौलाना ने कहा कि केंद्र सरकार 1991 में धर्मस्थलों से जुड़े विवादों में यथास्थिति बनाये रखने को लेकर एक कानून पार्लियामेंट में पास कर चुकी है, इस कानून में बाबरी मस्जिद मुद्दे को बाहर रखा गया था| इस कानून में स्पष्ट तौर पर यह कहा गया है कि 1947 से पहले जो धर्म स्थल जिस स्थिति में था उसी स्थिति में रहेगा, ज्ञानवापी मस्जिद को भी इसी कानून के तहत सुरक्षा मिलीं हुई है|

मौलाना ने आगे कहा कि चंद फिरकापरस्त ताकतें भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और हिन्दू-मुस्लिम इत्तेहाद को तोड़ने में लगी हुई है, इससे देशवासियों को होशियार रहने की जरूरत है, ज्ञानवापी मस्जिद को बाबरी मस्जिद की तरह पोलीटिकल मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रहीं हैं

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