फ़ैक्ट चेक

फैक्ट चेक: इसरो की डायरेक्टर नहीं, डायरेक्टर रैंक की साइंटिस्ट बनी हैं खुशबू मिर्ज़ा

क़ौमी रिपोर्टर:सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही यह खबर ग़लत है कि खुशबू मिर्ज़ा इसरो की डायरेक्टर बनी हैं। खुसबू मिर्ज़ा (KHUSHBU MIRZA) की तस्वीर के साथ एक बैक ड्राप है जिस पर लिखा है IRS-1A was launched 30 years ago,इसी के नीचे इंग्लिश में लिखा है,35 साल की साइंटिस्ट खुशबू मिर्ज़ा तरक्की पाकर इसरो की डायरेक्टर बनी हैं।

यह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की छात्रा रही हैं।खुशबू दूसरी ऐसी मुस्लिम हैं जो डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के बाद इसरो के इस पद पर पहुंची हैं।इंडिया टुडे फैक्ट चेक टीम ने यह पाया कि खुशबू मिर्ज़ा को लेकर किया जा रहा यह दावा सही नहीं है।इतना ही नहीं डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को लेकर किया जा रहा दावा भी सही नहीं है।

डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने इसरो के कई प्रोजेक्ट को लीड ज़रूर किया लेकिन न तो वह इसके डायरेक्टर रहे और न ही इसरो के हेड का यह पद है।इसरो का हेड चेयरमैन कहलाता है।यह सच है कि अमरोहा उत्तर प्रदेश की रहने वाली और चंद्रयान 1 चंद्रयान 2 टीम की सदस्य रही खुशबू मिर्ज़ा ने मौजूदा साइंटिस्ट रैंक को जम्प किया है।

खुशबू मिर्ज़ा ने साइंटिस्ट-एफ रैंक को हासिल किया है जो डायरेक्टर रैंक का होता है। इसरो का चेयरमैन बनने वाला इससे भी दो रैंक ऊपर यानि साइंटिस्ट-एच रैंक का होता है।डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम भी रैंक-एच होल्ड करते थे लेकिन इसरो के चेयरमैन वह भी नहीं थे।इंडिया टुडे की इंग्लिश वेबसाइट ने यहां तक बताया कि खुद खुशबू मिर्ज़ा ने ट्वीट कर सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया प्लेटफार्म पर उन्हें लेकर दी जा रही खबरों को ग़लत बताया है।

खुशबू मिर्ज़ा का ट्वीट देखने की कोशिश की गई तो वह मिला नहीं।सर्च करने पर चार खुशबू मिर्ज़ा नाम की प्रोफाइल मिलती हैं।इनमे से तीन किसी अन्य खुशबू मिर्ज़ा की हैं जबकि चौथी प्रोफाइल लॉक है।

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