ऑफ़ बीटपॉज़िटिव स्टोरी

महामारी ने सिखाया, मंदिर-मस्जिद दोनों ज़रूरी, गुजरात से समझिए

क़ौमी रिपोर्टर:गुजरात के वडोदरा में जहांगीरपुरा मस्जिद में 50 बेड,दारुल उलूम में 120 बेड और स्वामीनारायण मंदिर में 500 बेड का कोविड सेंटर तैयार है।जिन्हे अज़ान से नींद नही आती और आरती में बजते घंटे जिनके लिए मुसीबत है उन लोगों को इस राहत भरी खबर से समझने की ज़रूरत है।यह समझने की ज़रूरत है कि हमें मस्जिद के साथ मंदिर और मंदिर के साथ मस्जिद क्यों चाहिए। मंदिर-मस्जिद (MANDIR-MASJID) दोनों ज़रूरी।

आज तक न्यूज़ वेबसाइट के मुताबिक कोरोना के ताज़ा हालात को लेकर गुजरात में स्थिति बेकाबू है। अहमदाबाद और वडोदरा जैसे शहरों में अस्पताल बढ़ती भीड़ के कारण बदहाली के मोड़ पर हैं।हाईकोर्ट ने भी रूपाणी सरकार पर इसे लेकर तल्ख टिप्पणी की है। ऐसे में मस्जिद और मंदिर एक साथ आगे आये। यहां मुगलपुरा की जहांगीरपुरा मस्जिद में 50 बेड का और दारुल उलूम में 120 बेड का कोविड सेंटर बनाया गया है जिसमें हर बेड पर ऑक्सीजन का इंतज़ाम है।
मस्जिद के इन्तेज़ामकार इरफान शेख कहते हैं,मज़हब और इबादतगाहें इंसानियत कायम करने के लिये ही तशकील किये गए थे,मौजूदा हालात में इंसानियत के लिए इन इबादतगाहों को सभी मज़हब के लिए आगे आने की ज़रूरत है।यही वजह है कि मस्जिद को कोरेंटइन सेंटर में तब्दील कर इसके दरवाज़े सभी मज़ाहिब के लिए खुले हैं।
उधर स्वामीनारायण मंदिर ने भी 500 बेड का कोविड केयर सेंटर बनाकर इस कठिन समय में इसके दरवाज़े सभी के लिए खोल रखे हैं।

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