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प्रयागराज में खाकी शर्मसार: तीन दरोगाओं पर बेकसूर युवकों को स्मैक तस्कर बनाने और 5.67 लाख रुपये हड़पने का आरोप, ऑडियो से खुली पोल

शादी की खरीदारी करने आए मध्य प्रदेश के युवक को एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट में फंसाने का आरोप, कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी की खारिज; तीन चौकी इंचार्ज निलंबित

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला प्रयागराज से सामने आया है। नैनी इलाके में शादी की खरीदारी करने आए मध्य प्रदेश के एक युवक और उसके दोस्त को कथित तौर पर स्मैक तस्कर और अवैध हथियार रखने का आरोपी बनाकर फंसाने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, युवकों के पास मौजूद 6.55 लाख रुपये में से 5.67 लाख रुपये गायब होने का भी आरोप है। मामले में कथित बातचीत का ऑडियो सामने आने के बाद तीन चौकी इंचार्जों को निलंबित कर दिया गया है।

शादी की खरीदारी करने प्रयागराज आए थे युवक

मामला 15 अक्टूबर का बताया जा रहा है। मध्य प्रदेश के रीवा निवासी विपिन कुमार पाठक की नवंबर में शादी होनी है। वह अपने दोस्त आकाश सिंह के साथ शादी की खरीदारी के लिए प्रयागराज आया था। आरोप है कि नैनी क्षेत्र में पुलिस ने उनकी कार रोककर तलाशी ली, जिसमें 6.55 लाख रुपये नकद मिले। युवकों ने पुलिस को बताया कि यह रकम शादी और खरीदारी के लिए लाई गई है।

40 पुड़िया स्मैक और हथियार बरामद दिखाने का आरोप

आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने दोनों युवकों के खिलाफ 40 पुड़िया स्मैक, तमंचा, पिस्टल, कारतूस और मोबाइल फोन बरामद होने की कहानी तैयार कर दी। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें अदालत में पेश किया गया।

मामले में सबसे गंभीर सवाल नकदी को लेकर उठा। आरोप है कि तलाशी के दौरान 6.55 लाख रुपये मिले थे, जबकि एफआईआर में केवल 87,500 रुपये की बरामदगी दर्ज की गई। इस तरह शेष 5,67,500 रुपये का हिसाब संदिग्ध हो गया।

अदालत में पुलिस की कहानी पर उठे सवाल

मामला अदालत पहुंचा तो पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हुए। बताया जा रहा है कि अदालत ने बरामद असलहों का निरीक्षण किया, जिनकी स्थिति जंग लगी हुई और इस्तेमाल के योग्य नहीं पाई गई। बरामदगी और तलाशी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। अदालत ने पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज करते हुए पहले पुलिस की भूमिका की जांच किए जाने की आवश्यकता जताई। इससे दोनों युवकों को बड़ी राहत मिली।

ऑडियो रिकॉर्डिंग ने बढ़ाई पुलिसकर्मियों की मुश्किलें

मामले में नया मोड़ तब आया, जब आरोप है कि तीनों दरोगाओं ने कथित तौर पर एक बिचौलिए के माध्यम से पीड़ित आकाश सिंह से संपर्क किया और रुपये वापस करने की बात कही। इस बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग पीड़ित ने कर ली। रिकॉर्डिंग वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।

तीन चौकी इंचार्ज निलंबित

डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में आरोपों से जुड़े तथ्य सही पाए जाने पर तीनों चौकी इंचार्जों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में अरैल चौकी इंचार्ज विक्की गुप्ता, कांशीराम चौकी इंचार्ज रामानंद विश्वकर्मा और कारागार चौकी इंचार्ज नीलेश कुमार शामिल हैं।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि अदालत ने बरामदगी और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल न उठाए होते और कथित बातचीत का ऑडियो सामने न आया होता, तो क्या दोनों युवकों को गंभीर आपराधिक मुकदमे में फंसकर जेल जाना पड़ता? अब निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि नकदी कहां गई और पूरे घटनाक्रम में किसकी क्या भूमिका रही।

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