प्रो. फरजाना मेहदी का संदेश—चिकित्सा पेशे में नैतिकता और मानवीय संवेदना सर्वोपरि, पांच साल की यात्रा में अनुशासन और सेवा भाव पर दिया जोर
लखनऊ। एरा मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को एमबीबीएस-2026 बैच के नवप्रवेशी छात्रों के लिए भव्य व्हाइट कोट सेरेमनी का आयोजन किया गया। एरा विश्वविद्यालय के केंद्रीय सभागार में आयोजित समारोह में नए मेडिकल छात्रों ने सफेद एप्रेन धारण कर चिकित्सा जगत में अपने नए सफर की शुरुआत की। इस अवसर पर छात्रों को महर्षि चरक शपथ दिलाई गई और उन्हें चिकित्सा पेशे की गरिमा, नैतिकता, अनुशासन तथा मानवीय संवेदनाओं का महत्व समझाया गया।
समारोह में एरा विश्वविद्यालय की प्रो-वाइस चांसलर प्रो. फरजाना मेहदी, एरा मेडिकल कॉलेज के डीन एमिरेट्स प्रो. एमएमए फरीदी, प्रिंसिपल प्रो. जमाल मसूद, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष और फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे। अतिथियों ने नवप्रवेशी छात्रों को एप्रेन पहनाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
‘कम्फर्ट जोन से बाहर निकलेंगे, तभी होगा विकास’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एरा विश्वविद्यालय की प्रो-वाइस चांसलर प्रो. फरजाना मेहदी ने कहा कि जीवन में विकास के लिए अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले कई छात्र पहली बार अपने घर-परिवार से दूर हुए हैं। ऐसे में उनके मन में खुशी के साथ अपनों से दूर होने की कसक भी स्वाभाविक है, लेकिन यही बदलाव उन्हें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बनाएगा।
प्रो. मेहदी ने छात्रों से नए माहौल को खुले मन से अपनाने, अपने सहपाठियों का सहयोग करने और सकारात्मक संबंध विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि चिकित्सा का पेशा बेहद पवित्र और जिम्मेदारी से भरा हुआ है। एक अच्छे डॉक्टर की पहचान केवल उसकी चिकित्सकीय दक्षता से नहीं, बल्कि उसके नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और मरीजों के प्रति मानवीय व्यवहार से भी होती है।
उन्होंने अभिभावकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति छात्रों का उत्साह बढ़ाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले पांच वर्षों तक बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के निर्माण में अभिभावकों का सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा। एरा प्रबंधन और विश्वविद्यालय नेतृत्व की ओर से भी अभिभावकों को महत्वपूर्ण हितधारक बताते हुए उनके साथ बेहतर संवाद और सहभागिता पर जोर दिया गया।
‘देश की सेहत की रक्षा करेंगे मेडिकल छात्र’

एरा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. जमाल मसूद ने एमबीबीएस-2026 बैच के छात्रों और उनके अभिभावकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह दिन छात्रों के लिए बेहद खास है, क्योंकि इसके पीछे उनकी वर्षों की मेहनत, लगन और अनुशासन शामिल है। उन्होंने छात्रों को कॉलेज के नियमों, उपस्थिति, अवकाश और अन्य आवश्यक दिशा-निर्देशों की जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़ने और उनका पालन करने की सलाह दी।
वहीं, डीन एमिरेट्स प्रो. एमएमए फरीदी ने छात्रों को चिकित्सा पेशे की व्यापक जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा कि जिस तरह सैनिक देश की रक्षा करते हैं, उसी तरह डॉक्टर देश की सेहत की रक्षा करते हैं। उन्होंने चिकित्सा को पवित्र पेशा बताते हुए कहा कि इसमें सेवा, समर्पण और आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। साथ ही उन्होंने अभिभावकों को आश्वस्त किया कि कॉलेज में उनके बच्चों की देखभाल और मार्गदर्शन का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
हॉस्टल को बनाएं दूसरा घर, अनुशासन से मिलेगी सफलता

एरा विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार एवं गर्ल्स हॉस्टल की वार्डेन प्रो. अनु चंद्रा ने छात्रों को विश्वविद्यालय के वातावरण और छात्रावास जीवन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हॉस्टल जीवन स्वतंत्रता की दिशा में पहला कदम है, जहां छात्रों को अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर नई परिस्थितियों के अनुरूप ढलना सीखना होगा। उन्होंने कहा कि छात्रावास धीरे-धीरे उनका दूसरा घर बन जाएगा और वहां बिताई गई यादें जीवनभर उनके साथ रहेंगी। उन्होंने छात्रों से नियमों का पालन करने और अपने रूममेट के प्रति सम्मानजनक व्यवहार रखने की अपील की।
विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर एवं वार्डेन डॉ. दिलशाद अली रिजवी ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के साथ ही छात्रों के जीवन का नया अध्याय शुरू हो गया है। सफलता के लिए अनुशासन बेहद जरूरी है और किसी भी परिस्थिति में नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने छात्रावास के नियमों का पालन करने की अपील करते हुए स्पष्ट किया कि कॉलेज में रैगिंग के लिए कोई जगह नहीं है।
राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन

समारोह का संचालन डॉ. सोनिया ने किया, जबकि प्रो. ब्रजेश राठौर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
व्हाइट कोट सेरेमनी के माध्यम से नवप्रवेशी मेडिकल छात्रों को यह संदेश दिया गया कि डॉक्टर बनना केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा और समाज की सेवा का संकल्प है। सफेद एप्रेन के साथ छात्रों ने चिकित्सा शिक्षा की जिस यात्रा की शुरुआत की है, उसमें ज्ञान, अनुशासन, नैतिकता और मानवीय संवेदना उनकी सबसे बड़ी ताकत होंगी।
