संस्कृति

शब-ए-बराअत पर रौशनी से नहाए कब्रिस्तान

रायबरेली,क़ौमी रिपोर्टर:शब-ए-बराअत ( SHAB-E-BARAT) की रात मुस्लिम कब्रिस्तानों में खूब रौनक़ रही।इस दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों के रिश्तेदार उनकी कब्र पर जाकर रौशनी करते नज़र आये।किसी ने अपनो की कब्र फूलों से सजाई तो किसी ने कैंडल जलाया। नसीराबाद के एक कब्रिस्तान में रिश्तेदार की कब्र पर रौशनी करने पहुंचे मुश्ताक हुसैन ने बताया कि इस्लामिक कैलेंडर की 14/15 शाबान की रात शब-ए-बराअत कहलाती है।इस्लामिक नज़रिये से यह रात अहम होती है और इस खास तारीख को मांगी गई दुआ रद्द नहीं होती।यही वजह है कि इस रात हम लोग अपने रिश्तेदारों की कब्र पर पहुंच कर उनके हक में दुवायें करने के अलावा उनके लिए सूरह फातेहा पढ़ते हैं जिसका उन्हें सवाब हासिल होता है।

इस मौके पर लोग एक दिन पहले ही उस स्थान पर पहुंचने लगते हैं जहां के कब्रिस्तान में उनके रिश्तेदार दफन होते हैं।

यहां के अली शहीद कब्रिस्तान में अपने वालिदा की कब्र पर रौशनी करने और फातेहा पढ़ने पहुंचने बाक़िर रिज़वी ने कहा कि इस रात का उन्हें बेसब्री से पूरे साल इंतेज़ार रहता है।वह कहते हैं उनकी वालिदा का इन्तेक़ाल हुए अरसा बीत गया लेकिन हर साल शब-ए-बराअत की रात उनकी कब्र पर खुसूसी फातेहा के बाद ऐसा महसूस होता है जैसे आज भी वह हमारे साथ ही हैं।

बाक़िर ने कहा वैसे तो पूरे साल जब भी मौका मिलता है कब्र पर फातेहा पढ़ने पहुंच जाते हैं लेकिन इस रात जो सुकून हासिल होता है वह पूरे साल महसूस नहीं होता।

हम बता दें कि पूरी दुनिया में जहां जहां मुसलमान हैं शब-ए-बराअत की रात उनकी कोशिश होती है कि वह अपने आइज़्ज़ा की कब्र पर ज़रूर पहुंचें।

संबंधित पोस्ट

Raebareli News: ईद-उल-अजहा पर डॉ. शशिकांत शर्मा ने पेश की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, ईदगाह में लगाया सेवा शिविर, नमाजियों को पिलाया शरबत, इत्र लगाकर दी मुबारकबाद

Qaumi Reporter

एसजेएस में अमृत महोत्सव, सबका साथ सबका विश्वास से देश होगा आगे : रमेश बहादुर सिंह

Qaumi Reporter

तीन तलाक़ के बाद अब बुर्के पर शिगूफ़ा, बीजेपी मिनिस्टर ने पाबंदी की वकालत की

Qaumi Reporter

Leave a Comment