झाँसी,क़ौमी रिपोर्टर:अक्लियती तबके की समाजी शुमूलियत के लिए क्या किया जाना चाहिए इसी को लेकर यहां परमार्थ एनजीओ की जानिब एक सेमिनार मुनक़्क़ीद की गई।अक्लियती उमूर वजारत के ताऊन से मुनक़्क़ीद इस सेमिनार में अपने शोबे के माहिर अफ़राद ने शिरकत की।

सेमिनार में शिरकत करने आये पंजाब के साबिक़ स्टेट मिनिस्टर और सेमिनार के मेहमान खुसूसी वसीम रज़ा ने कहा कि ‘अल्पसंख्यकों के सामाजिक समावेशन के लिए शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता आवश्यक है।
सरकारी और गैर सरकारी सहयोग लेकर अल्पसंख्यक वर्ग न केवल अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति सही कर सकता है, बल्कि राजनैतिक हिस्सेदारी भी बढा सकता है।हम किसी भी जाति,वर्ग के हों, अभिभावकों को चाहिए कि भले ही वो एक समय की रोटी खायें, लेकिन अपने बच्चों को अवश्य पढायें।”

सरकारी म्यूज़ियम आडिटोरियम में मुनक़्क़ीद सेमिनार में बोलते हुए मेहमाने ख़ुसूसी वसीम रजा ने कहा कि अल्पसंख्यकों के पिछडेपन की जब बात होती है,तो उसमें सबसे बडा तबका मुस्लिम अल्पसंख्यकों का आता है,जो हर तरीके से पिछडेपन का शिकार है। उन्हें समाज की मुख्य धारा से जुडने के लिए स्वयं आगे आना होगा और शासकीय योजनाओं का लाभ उठाकर अपना सशक्तिकरण करना होगा। उन्होंने कहा कि हम अल्पसंख्यक जो पिछड़े है उसमें स्वयं हमारी ही कमी रही है। अल्पसंख्यकों को 

अब शिक्षित होकर हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की जरूरत है। उन्होनें कहा कि मुस्लिमों को दिल में कुरान रखकर और हाथ में कम्प्यूटर पकड़ने की जरूरत है, ताकि वे समय के साथ कदमताल कर सकें।
सेमिनार को चीफ स्पीकर के तौर पर खेताब करते हुए भारत सरकार के साबिक़ सेंट्रल ग्रामीण राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि सामाजिक असमानताओं को दूर करने के लिए सामाजिक भागीदारी बहुत जरुरी है। आज अल्पसंख्यकों के समक्ष शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा आदि की समस्यायें हैं, इसको दूर करने के लिए लोकतान्त्रिक तरीके से राजनैतिक भागेदारी सुनिश्चित करनी होगी।
इनागरल सेशन के चीफ गेस्ट पेश इमाम मुफ्ती साबिर अंसारी ने कहा कि दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम भी हमें बराबरी का हक दिलवा सकती है। बिना तालीम और बिना इल्म के हम मुर्दा के मानिंद हैं। उन्होनें कुरान के हवाले से भी तालीम और यकजहती की अहमियत को बताया।
इस दौरान शिया अलीम ए दीन मौलाना सैयद शाने हैदर जैदी ने कहा कि जिंदा कौमें अपनी तारीखें खुद लिखती हैं, हमें दूसरों का सहारा न लेकर खुद ही जद्दो जेहद करना होगा,तभी हम समाजी और एकतेसादी हालात को बेहतर बना सकते हैं।
इनागरल सेशन की सदारत करते हुए मौलाना याकूब ने कहा कि हिन्दोस्तान के मिक्स्ड कल्चर और यकजहती को कायम करना होगा। उन्होंने समाज के सभी तबकों को एक दूसरे की इज़्ज़त करने और उनके दुख-दर्द में शरीक होते हुए समाजी शुमूलियत पर ज़ोर दिया। इस दौरान उन्होंने हिन्दोस्तानी कल्चर को दुनिया का सबसे अज़ीम कल्चर बताते हुए जंगे आजादी में अक्लियती तबके के ताऊन पर चर्चा की।
आये हुए मेहमानों का इस्तेकबाल करते हुए परमार्थ एनजीओ के सेक्रेट्री डाॅ. संजय सिंह ने कहा कि “समाज के सभी वर्गों का सभी क्षेत्रों में समान प्रतिनिधित्व होना ही परिपक्व लोकतन्त्र की निशानी है। अल्पसंख्यकों के समक्ष आज विभिन्न क्षेत्रों के समक्ष जो चुनौतियां हैं, उनका समाधान समन्वित तरीके से करके हम समावेशी समाज की कल्पना को साकार कर सकते हैं।”
इस दौरान सोसायटी फाॅर एजुकेशनल हेल्थ एण्ड रुरल डेवलेपमेन्ट फाउण्डेशन नई दिल्ली के डाएरेक्टर मोहम्मद एजाज आलम ने कहा कि हमें अपनी सोच का दायरा बढ़ाकर ही जीना चाहिए। अक्लियती तबके कोे आगे बढ़ाने के लिए उन्हें खुद ही कोशिश करनी होगी।
सामईन को खेताब करते हुए फिल्म और टी.वी. ऐक्टर आरिफ शहडोली ने कहा कि भागो नहीं दुनिया को बदलो,के फार्मूले से ही अक्लियती तबके की तकदीर व तदबीर बदल सकते हैं।
सिक्ख धर्मगुरु ज्ञानी महेन्द्र सिंह ने कहा “धर्म सिर्फ एक विचारधारा है, हम सकारात्मकता के साथ लक्ष्य निर्धारित कर अपनी विचारधारा में थोड़ा सा बदलाव कर समाज को आगे ला सकते हैं। हमारे लिए जरूरी है कि हम दूसरे धर्मों से भी अच्छी बातें सीखे।”
सेमिनार में डाॅ. मो. फुरकान, डाॅ. शारदा सिंह, डाॅ.मुहम्मद नईम, अनिरुद्ध गोयल, समन खान, अजीत सिंह कोहली ने भी खेताब किया। इस मौके पर शेख अरशद, हाफिज रियाज, अलीम अहमद खान, रईस खान, आकिब खान, सरफराज मासूम, मुकेश सिंघल, मो. महताब, अमरदीप बमोनिया, मो. फजल, संध्या निगम, रिहाना मंसूरी, प्रीति बौद्ध समेत तमाम लोग शामिल रहे।
सेमिनार का आग़ाज़ चराग़ रौशन कर किया गया।
सेमिनार में शामिल अफ़राद को सोनिया, अनुराधा, दिव्या, सबा खान, सना खान, अंकित साहू, धीरज कुमार वगैरह ने फूलों का गुच्छा दिया और बैच लगाये। सेमिनार के कन्वीनर डाॅ. मुहम्मद नईम और डॉक्टर संजय सिंह ने आये हुए लोगों का शुक्रिया अदा किया।
