राज्यसाहित्य

लखनऊ की नस-नस से वाकिफ पदमश्री योगेश प्रवीण नहीं रहे, साहित्य जगत में शोक की लहर

लखनऊ,क़ौमी रिपोर्टर:अवध का इनसाइक्लोपीडिया कहे जाने वाले डा.योगेश प्रवीण (yogesh pravin) नहीं रहे। पद्म पुरुस्कार से सम्मानित डा. योगेश के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।सोमवार को योगेश की तबियत खराब होने पर परिजन इन्हें बलरामपुर हॉस्पिटल ले जा रहे थे लेकिन उन्होंने रास्ते मे ही अंतिम सांस ली।

विद्यान्त महाविद्यालय में लेक्चरर रहे योगेश 2002 में रिटायर होने के बाद पूरी तरह से साहित्य सेवा और लखनऊ समेत अवध के इतिहास को सहेजने का काम करते रहे हैं।

अवध और लखनऊ के इतिहास को समेटे उनकी 30 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिसमे हर किताब लखनऊ के आइने का मजमुआ है।
लक्ष्मणपुर की आत्मकथा,लखनऊनामा,दास्ताने अवध,ताजदार अवध,लखनऊ के मोहल्ले और उनकी शान,लखनऊ मॉन्यूमेंट्स समेत दर्जनों ऐसी किताबें वो पीछे छोड़ गए जिनके एक एक हर्फ लखनऊ और अवध के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाते रहेंगे।

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