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रायबरेली में 12 नवंबर से सजेगा आचार्य द्विवेदी स्मृति पुस्तक मेला, छह राज्यों की लोक संस्कृतियों का दिखेगा संगम

‘लोकरंग-पुस्तकों संग’ थीम पर सात दिवसीय आयोजन, असम के लोकनृत्य से लेकर बुंदेलखंड के लोकगीतों तक बिखरेंगे सांस्कृतिक रंग; 18 नवंबर को युवा कवि सम्मेलन के साथ होगा समापन

रायबरेली। किताबों की दुनिया के साथ देश की विविध लोक संस्कृतियों का संगम देखने को मिलेगा। रायबरेली के फ़ीरोज़ गांधी कॉलेज परिसर में 12 से 18 नवंबर तक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति पुस्तक मेले का आयोजन किया जाएगा। इस बार मेले की थीम ‘लोकरंग-पुस्तकों संग’ रखी गई है। सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छह राज्यों की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ लोकनृत्य, लोकगीत, नाटक और विभिन्न प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति न्यास और फ़ीरोज़ गांधी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले पुस्तक मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कॉलेज के संस्थापक प्रबंधमंत्री ओंकार नाथ भार्गव की जन्मशताब्दी के अवसर पर इस बार मेला परिसर उनके नाम को समर्पित रहेगा। मेले में पुस्तकों की प्रदर्शनी और बिक्री के साथ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

असम, हिमाचल और बुंदेलखंड के कलाकार बिखेरेंगे लोक संस्कृति के रंग

मेले में असम के कामरूप जिले के लक्ष्मीनाथ नागारा नाम दल के लोक कलाकार विशेष लोकनृत्य प्रस्तुत करेंगे। हिमाचल प्रदेश के लोक कलाकार सरनु राम ‘बिट्टू प्रेमी’ वहां की लोक संस्कृति की झलक दिखाएंगे। वहीं बुंदेलखंड की चर्चित लोक गायिका उर्मिला पांडेय लोकगीतों के जरिए दर्शकों को लोकधुनों की दुनिया से रूबरू कराएंगी। अवध के बिरहा और अन्य राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी।

न्यास के संयोजक गौरव अवस्थी ने बताया कि पुस्तक मेले को केवल किताबों की प्रदर्शनी तक सीमित न रखकर साहित्य, लोककला और संस्कृति के साझा उत्सव के रूप में तैयार किया गया है।

13 नवंबर को उद्घाटन और सम्मान समारोह

समिति के अध्यक्ष विनोद शुक्ल ने बताया कि 13 नवंबर को पुस्तक मेले का औपचारिक उद्घाटन एवं सम्मान समारोह आयोजित होगा। इसमें राजस्थान, महाराष्ट्र और दिल्ली से आने वाले विशिष्टजनों को प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जाएगा। स्कूली बच्चों के लिए वाद-विवाद, चित्रकला और स्वरचित कविता सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं भी होंगी। इसके अलावा भारतीय जन नाट्य मंच (इप्टा) के रंगकर्मी ‘चमत्कार’ नाटक का मंचन करेंगे।

20 से अधिक प्रकाशनों के स्टॉल लगाने की तैयारी

पुस्तक मेले के संयोजक करुणा शंकर मिश्र के अनुसार नेशनल बुक ट्रस्ट, राजकमल प्रकाशन और लोकभारती सहित 15 से अधिक प्रकाशनों ने अपने स्टॉल लगाने की सहमति दे दी है। अन्य प्रकाशनों से भी संपर्क किया जा रहा है। मेले में साहित्य, संस्कृति और बच्चों के लिए उपयोगी पुस्तकों की उपलब्धता रहेगी।

मेले में लेखकों और कवियों की पुस्तकों के विमोचन एवं लोकार्पण के लिए भी विशेष स्थान निर्धारित किया गया है। जो लेखक मेले के दौरान अपनी पुस्तक का विमोचन कराना चाहते हैं, वे आयोजन समिति से संपर्क कर सकते हैं।

सात दिनों तक होंगे विविध आयोजन

12 नवंबर: सुबह 9 बजे बुजुर्गों एवं महिलाओं की रस्साकशी, कुर्सी दौड़ और रूमाल झपट्टा जैसी खेलकूद प्रतियोगिताएं होंगी। शाम 6 बजे फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित होगी।

13 नवंबर: सुबह 9:30 बजे स्कूली बच्चों की वाद-विवाद, चित्रकला और स्वरचित कविता प्रतियोगिताएं होंगी। शाम 6 बजे औपचारिक उद्घाटन एवं सम्मान समारोह होगा।

14 नवंबर: शाम 6 बजे अवध के बिरहा और हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।

15 नवंबर: दोपहर 12 बजे प्रगतिशील लेखक संघ का जिला सम्मेलन होगा। शाम 5 बजे बच्चों की सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के साथ इप्टा के नाटक ‘चमत्कार’ का मंचन होगा।

16 नवंबर: पूर्वाह्न 11 बजे युवाओं की कार्यशाला आयोजित होगी। शाम 6 बजे बुंदेलखंड के लोकगीतों और लखीमपुर खीरी के नेत्रहीन बच्चों की प्रस्तुतियां होंगी।

17 नवंबर: पूर्वाह्न 11 बजे स्वास्थ्य मेले का आयोजन होगा। शाम 6 बजे असम के लोक कलाकार विशेष प्रस्तुति देंगे।

18 नवंबर: शाम 6 बजे युवा कवि सम्मेलन के साथ सात दिवसीय आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति पुस्तक मेले का समापन होगा।

पुस्तकों, साहित्य, लोकगीतों, नृत्य और रंगमंच की विविध प्रस्तुतियों के साथ यह आयोजन रायबरेली के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक जीवन में नई ऊर्जा भरने की उम्मीद जगा रहा है।

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