न्यायिक सजा पूरी होने के बाद भी आर्थिक तंगी के चलते जेल में बंद थे सगीर और कुलदीप, फोरम ने भरा 20 हजार रुपये का जुर्माना
रायबरेली।12 नवंबर 2026
इंसानियत और सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए ऑल इंडिया पयामे इंसानियत फोरम की रायबरेली यूनिट ने आर्थिक तंगी से जूझ रहे दो कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ किया। न्यायिक सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद जुर्माने की रकम जमा नहीं कर पाने के कारण जेल में बंद सगीर और कुलदीप को फोरम ने आर्थिक सहायता देकर रिहा कराया। दोनों कैदियों की रिहाई जिला जेल रायबरेली से कराई गई।
जानकारी के मुताबिक, फतेहपुर निवासी सगीर दुष्कर्म के मामले में सजा पूरी कर चुका था, लेकिन 15 हजार रुपये का आर्थिक दंड जमा नहीं कर पाने के कारण उसकी रिहाई अटकी हुई थी। वहीं, रायबरेली निवासी कुलदीप मारपीट के मामले में सजा पूरी करने के बाद पांच हजार रुपये का जुर्माना नहीं भर पाने के चलते जेल में बंद था।
20 हजार रुपये का जुर्माना भरकर कराई रिहाई
दोनों कैदियों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ऑल इंडिया पयामे इंसानियत फोरम की रायबरेली यूनिट ने मदद के लिए कदम बढ़ाया। फोरम की ओर से सगीर का 15 हजार रुपये और कुलदीप का पांच हजार रुपये का आर्थिक दंड जमा किया गया। इस तरह कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना भरकर दोनों की रिहाई सुनिश्चित कराई गई।
आर्थिक मजबूरी बनी थी रिहाई में बाधा
सजा की अवधि पूरी होने के बाद भी जुर्माने की रकम जमा नहीं कर पाने के कारण दोनों कैदियों को जेल में रहना पड़ रहा था। ऐसे में फोरम की ओर से दी गई आर्थिक सहायता उनके लिए राहत साबित हुई। जुर्माने की राशि जमा होने के बाद दोनों को जिला जेल रायबरेली से रिहा कर दिया गया।
ऑल इंडिया पयामे इंसानियत फोरम की इस पहल को जरूरतमंदों की मदद और मानवीय संवेदनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहायता देकर उन्हें मुश्किल परिस्थितियों से उबारने की दिशा में इस तरह के प्रयास सामाजिक सहयोग के महत्व को भी रेखांकित करते हैं।
