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Minority Attack in India: बीते 3 साल में हिंदुस्तान में अल्पसंख्यकों पर हुए 140 हमले; संसद में सरकार बोली- मेरे पास कोई डेटाबेस नहीं

Minority Attack in India:

Minority Attack in India: मोदी सरकार के बीते 3 साल में अल्पसंख्यकों पर 140 से अधिक हमले हुए. वहीं इस मामले में संसद में मोदी सरकार ने कहा कि इसको लेकर उनके पास कोई डेटाबेस नहीं है.

याचिकाओं का रिकॉर्ड: एनसीएम के आंकड़े
एनसीएम के आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में सर्वाधिक 51 याचिकाएं दर्ज की गईं। इसके बाद 2022-23 और 2023-24 में प्रत्येक वर्ष 30 याचिकाएं मिलीं। 2024-25 में अब तक 29 याचिकाएं प्राप्त हो चुकी हैं।

केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से जानकारी
बीते तीन साल में केंद्र सरकार को अल्पसंख्यकों पर हमलों से संबंधित कुल 140 याचिकाएं प्राप्त हुईं। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने सोमवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी। यह जानकारी सीपीआईएम के सांसद जॉन ब्रिटास द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई, जिसमें उन्होंने ऐसे हमलों के संबंध में सेंट्रल डेटाबेस के बारे में पूछा था।

केंद्रीय मंत्री का बयान: नहीं है कोई केंद्रीय रिकॉर्ड
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि सरकार के पास अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराधों का कोई केंद्रीय रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) द्वारा प्राप्त याचिकाओं का रिकॉर्ड रखा जाता है।

क्षेत्रवार याचिकाओं का आंकड़ा
Minority Attack in India: क्षेत्र के हिसाब से देखें तो दिल्ली में सबसे अधिक 34 याचिकाएं प्राप्त हुईं। उत्तर प्रदेश से 29 याचिकाएं आईं, जबकि महाराष्ट्र से 10, मध्य प्रदेश से 8, पश्चिम बंगाल से 7, पंजाब से 7, हरियाणा से 7, केरल से 6 और कर्नाटक से 6 याचिकाएं आईं। उल्लेखनीय है कि मणिपुर से कोई याचिका प्राप्त नहीं हुई है, जहां वर्तमान में जातीय संघर्ष जारी है और जहां 40% से अधिक ईसाई आबादी निवास करती है।

अल्पसंख्यक समुदायों का दर्जा
भारत में छह समुदायों को अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त है—मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत इन समुदायों को अल्पसंख्यक माना गया है।

मंत्री का बयान: सशक्तीकरण योजनाएं
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय इन छह समुदायों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए योजनाएं लागू करता है, जो विशेष रूप से कमजोर वर्गों के लिए हैं।”

सांसद का आपत्ति: डेटाबेस की आवश्यकता
हालांकि, मंत्री के जवाब पर सांसद जॉन ब्रिटास ने आपत्ति जताई और इसे कपटपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक हमलों पर केंद्रीकृत डेटाबेस बनाए रखने से इनकार करना अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए लागू की जा रही प्रथाओं के विपरीत है।

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