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यूपी में बोतलबंद पानी पर बड़ा एक्शन: 57 फर्मों के लाइसेंस निलंबित, 242 नमूनों की जांच में सिर्फ 39 मिले पीने योग्य

ई-कोलाई, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड मिलने से बढ़ी चिंता; एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर असुरक्षित पानी बनाने वाली इकाइयों का उत्पादन बंद करने का आदेश

लखनऊ, 14 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में बोतलबंद पानी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रदेशभर में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर और पैकेज्ड मिनरल वाटर की जांच के दौरान 57 नमूने सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी के कारण असुरक्षित पाए गए। इन नमूनों से जुड़ी निर्माण इकाइयों के खाद्य लाइसेंस निलंबित करने और उत्पादन तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में 146 अन्य नमूने भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह जानकारी 14 अक्टूबर को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।

242 नमूनों की जांच, सिर्फ 39 पीने योग्य

एफएसडीए की ओर से चलाए गए प्रदेशव्यापी अभियान के तहत बोतलबंद पानी बनाने वाली इकाइयों से कुल 242 नमूने लेकर जांच कराई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 57 नमूने सूक्ष्मजीव संबंधी जांच में असुरक्षित पाए गए, जबकि 146 नमूने अधोमानक घोषित किए गए। केवल 39 नमूने ही पीने योग्य पाए गए।

इन आंकड़ों ने बोतलबंद पानी की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अधोमानक और असुरक्षित नमूनों की श्रेणियां अलग-अलग हैं। इसलिए सभी 203 नमूनों को एक ही तरह से असुरक्षित घोषित करना सही नहीं होगा।

पानी में मिले ई-कोलाई, कोलीफॉर्म और फफूंद संबंधी सूक्ष्मजीव

प्रयोगशाला जांच में कुछ नमूनों में ई-कोलाई (E. coli), कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड जैसे हानिकारक सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी सामने आई। पानी में इस तरह के सूक्ष्मजीवों का पाया जाना स्वच्छता और निर्माण प्रक्रिया में गंभीर खामियों का संकेत हो सकता है।

ई-कोलाई की कुछ प्रजातियां पेट और आंतों में संक्रमण का कारण बन सकती हैं। दूषित पेयजल से दस्त, उल्टी और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। हालांकि, किसी व्यक्ति के बीमार होने की पुष्टि केवल पानी की जांच रिपोर्ट से नहीं की जा सकती।

39 जिलों में मिलीं असुरक्षित पानी की इकाइयां

रिपोर्ट के अनुसार, असुरक्षित नमूनों से जुड़ी निर्माण इकाइयां प्रदेश के 39 जिलों में स्थित हैं। गाजियाबाद और हापुड़ में सबसे अधिक चार-चार असुरक्षित नमूने मिले। गौतमबुद्ध नगर और अयोध्या में तीन-तीन नमूने असुरक्षित पाए गए।

लखीमपुर खीरी, प्रयागराज, बरेली, बिजनौर, जौनपुर, हाथरस, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर में दो-दो नमूने असुरक्षित मिले। लखनऊ समेत कई अन्य जिलों में एक-एक नमूना असुरक्षित पाया गया।

वहीं, गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले नमूनों के मामले में चंदौली सबसे ऊपर रहा, जहां 12 नमूने अधोमानक मिले। अयोध्या, बाराबंकी, गाजियाबाद और जौनपुर में आठ-आठ नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। कानपुर नगर में सात, जबकि आगरा और बरेली में छह-छह अधोमानक नमूने पाए गए।

उत्पादन दोबारा शुरू करने के लिए पांच बैच की जांच जरूरी

एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर असुरक्षित नमूनों से जुड़ी इकाइयों को कमियों को दूर करने और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जिन इकाइयों के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं, उन्हें सुधार के बाद पांच बैच की जांच करानी होगी। प्रत्येक बैच में 1,000 बोतलें शामिल होंगी। उत्पादन दोबारा शुरू करने की अनुमति तभी दी जाएगी, जब निर्धारित जांच में नमूने मानकों पर खरे उतरेंगे।

अधोमानक पानी बनाने वाली इकाइयों को कमियां दूर करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। उन्हें सुधार साबित करने के लिए तीन बैच की जांच करानी होगी। संबंधित मंडलों के सहायक आयुक्त (खाद्य) सुधारों का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट मुख्यालय भेजेंगे। निर्धारित समय में सुधार नहीं करने वाली इकाइयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

बोतलबंद पानी खरीदते समय बरतें सावधानी

इस कार्रवाई के बाद उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे बोतलबंद पानी खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखें।

  • बोतल की सील और पैकेजिंग सही तरीके से बंद होनी चाहिए।
  • लेबल पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति से जुड़ी जानकारी देखें।
  • पानी की बोतल विश्वसनीय विक्रेता से ही खरीदें।
  • बोतल खुली, क्षतिग्रस्त या संदिग्ध दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल न करें।
  • किसी ब्रांड या इकाई के खिलाफ आधिकारिक प्रतिबंध की जानकारी मिलने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग से पुष्टि करें।

साफ और सुरक्षित पेयजल लोगों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा विषय है। एफएसडीए की यह कार्रवाई बताती है कि बोतलबंद पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना कितना जरूरी है। उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जांच में सामने आई कमियों को दूर कराना और नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर प्रभावी कार्रवाई करना अहम होगा।

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स की 14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टें।

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