Amit Shah on West Bengal: केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में त्रिभुवन यूनिवर्सिटी की स्थापना से संबंधित बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा, “अब सिर्फ पश्चिम बंगाल बचा है, चुनाव के बाद वहां भी कमल खिलेगा।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा त्रिभुवन यूनिवर्सिटी को सहकारी विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किए जाने और इसके नाम को त्रिभुवन भाई पटेल के नाम पर रखने को लेकर बयान दिया। शाह ने कहा कि यह प्रधानमंत्री द्वारा दी गई एक बड़ी श्रद्धांजलि है।
अमित शाह ने त्रिभुवन भाई पटेल के नेतृत्व में अमूल के सफलतापूर्वक स्थापित होने का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “त्रिभुवन भाई पटेल वह व्यक्ति हैं, जिनकी अगुवाई में 250 लीटर से शुरू हुआ सफर आज अमूल के रूप में हमारे सामने है।” इसके बाद, उन्होंने अमूल के टर्नओवर और इसके विकास को लेकर भी सदन में चर्चा की। अमित शाह ने यह बताते हुए सदन में अमूल की नींव पड़ने की कहानी भी साझा की और इसके आर्थिक प्रभाव की बात की।
शाह ने मोदी सरकार द्वारा गरीबों के लिए किए गए कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2014 में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने के बाद से गरीबों को घर, शौचालय, पीने का पानी, और अन्य कई सुविधाएं मुहैया कराई गईं। उन्होंने बताया कि पांच किलो मुफ्त अनाज देने, गैस देने और पांच लाख रुपये तक के इलाज का खर्च माफ करने जैसे कार्यक्रमों के जरिए सरकार ने गरीबों के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास किया। इसके अलावा, शाह ने यह भी बताया कि आयुष्मान भारत योजना अब दिल्ली में भी लागू हो गई है, जिससे गरीबों को इलाज की चिंता नहीं रहेगी।
अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि पहले दिल्ली में कमल नहीं खिला था, लेकिन अब दिल्ली में भी कमल खिला है और यही स्थिति पश्चिम बंगाल में भी होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों में भी बीजेपी को जीत मिलेगी और आयुष्मान भारत योजना वहां भी लागू होगी।
इसके बाद, शाह ने देश में सहकारिता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह स्वरोजगार से भी जुड़ी हुई है और यह गरीबों के आत्मसम्मान की रक्षा करने में मदद करती है। शाह ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश के लिए जीडीपी के साथ-साथ रोजगार भी एक बड़ा मानक है और सहकारिता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अमित शाह ने यह भी बताया कि मोदी सरकार ने तीन साल पहले सहकारी मंत्रालय स्थापित किया था और अब देश में साढ़े आठ लाख सहकारी समितियां हैं। उन्होंने कहा कि देश का हर पांचवां व्यक्ति सहकारिता से जुड़ा है और यह मंत्रालय लगातार काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि 75 साल से चल रहे सहकारिता आंदोलन में कई विसंगतियां थीं, जिन्हें अब दूर किया जा रहा है। शाह ने कहा कि अब राज्य सरकारों के सहयोग से सहकारिता का पूरा डेटाबेस तैयार किया गया है और जल्द ही देशभर में ढाई लाख नए पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां) बनाई जाएंगी, जिससे कोई भी गांव ऐसा नहीं रहेगा, जहां पैक्स न हो।
अमित शाह ने यह भी कहा कि पैक्स के बाइलॉज (नियम) में बदलाव किए गए हैं, ताकि वे विभिन्न आर्थिक कार्यकलापों को जोड़ सकें, जैसे कृषि ऋण, मधुमक्खी उत्पादन, डेयरी और कॉमन सर्विस सेंटर आदि। उन्होंने यह भी बताया कि देश में अब 43 हजार पैक्स ने कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया है, जहां केंद्र और राज्य की 300 से ज्यादा योजनाएं एक क्लिक पर उपलब्ध हैं।
अमित शाह ने इस प्रयास के लिए राज्यों की सरकारों का आभार व्यक्त किया और यह भी कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे देश के आर्थिक विकास में सुधार होगा और लोगों के जीवन स्तर में वृद्धि होगी।
